इन्टरनेट क्या है

इन्टरनेट क्या है? इन्टरनेट का फुल फॉर्म क्या है और इन्टरनेट के बारे में संपूर्ण जानकारी

 

इन्टरनेट क्या है, इन्टरनेट का फुल फॉर्म क्या है, इन्टरनेट का इतिहास और इन्टरनेट कैसे काम करता है ? नमस्कार दोस्तों आज हम ऐसे विषय के बारे में जानेंगे जो बहुत सारे लोगो के जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है और इस कोरोना समय में इसकी अहमियत और बढ़ गयी है और यही एक ऐसी चीज है जो पृथ्वी के बहुत सारे अलग अलग देशों को एक दूसरे से जोड़ने काम करती है तो आज हम जानेंगे कि इन्टरनेट क्या है (What is Internet in Hindi) है ? इन जानकारी से इन्टरनेट पर निबंध ( Essay on Internet in Hindi) भी लिख सकते है. 

इन्टरनेट क्या है – What is Internet in Hindi?

इन्टरनेट दुनिया भर से सारे कंप्यूटरों का एक बड़ा वैश्विक नेटवर्क है जिसके द्वारा सारे computers एक दूसरे से बात करते है. और इसी नेटवर्क के द्वारा हम बहुत सारी जानकारी घर बैठे प्राप्त कर लेते है. इन्टरनेट से जुड़ने के लिए आपके पास इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) होना चाहिए. इसी के द्वारा दुनिया के सारे कंप्यूटर एक दूसरे से जुड़े रहते है. इन्टरनेट को हम नेटवर्क एक बहुत बड़ा जाल कह सकते है जिसमे बहुत सारे छोटे छोटे नेटवर्क के जाल होते है. इन्टरनेट को एक पाइपलाइन भी कह सकते है जो इलेक्ट्रॉनिक मेसेज को एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क में भेजता है. इन्टरनेट क्या है अब तो समझ आ गया होगा. 

इन्टरनेट को Information Superhighway (सूचना सुपर हाइवे) भी कहा जाता है क्योकि इसी के द्वारा सारी दुनिया में सूचना का तेजी से प्रचार प्रसार होता है.

इंटरनेट को नेटवर्को का नेटवर्क क्यों कहा जाता है?

इन्टरनेट के द्वारा ही दुनिया भर के सारे कंप्यूटर एक दूसरे से जुड़े रहते है. बहुत सारे कंप्यूटरों के जुड़ने से बहुत सारे छोटे बड़े नेटवर्क बनते है जिस कारण इंटरनेट को नेटवर्को का नेटवर्क क्यों कहा जाता है.

इन्टरनेट का फुल फॉर्म क्या है 

इन्टरनेट का फुल फॉर्म है –  Interconnected Network

Meaning of Internet in Hindi

इन्टरनेट को हिंदी में अंतरजाल कहा जाता है.

इन्टरनेट की गति को किसमें मापा जाता है 

इन्टरनेट की स्पीड को बिट्स/सेकंड  (bits per second -bps) में मापा जाता है. इससे ज्यादा स्पीड को Kilobits Per Second (kbps), Megabits Per Second (Mbps), Gigabit per second (Gbps) में मापा जाता है. याद रखिये बिट्स और बाइट (byte) में अंतर होता है क्योकि 1 बाइट = 8 बिट.

इन्टरनेट कैसे काम करता है- How Internet works in Hindi 

जैसा कि मैंने ऊपर इन्टरनेट क्या है में बताया कि इन्टरनेट में दुनिया के सारे कंप्यूटर, Servers एक दूसरे से जुड़े हुए है. जुड़ने का मतलब है ये समुद्र के नीचे सबमरीनऑप्टिकल फाइबर केबल से जुड़े है. आप इन cables का जाल यहा देख सकते है. भारत में ये cables 4 शहरो से जुड़े है और इन्ही शहरो से ये पूरे देश में अंडरग्राउंड फैले हुए है और फिर यही केबल आपके jio, bsnl, airtel आदि के मोबाइल टावर से जुड़े होते है और फिर मोबाइल टावर से सिग्नल के जरिये ये आपके मोबाइल में इन्टरनेट सेवा देता है और कभी कभी समुद्र में इन cables शार्क नुकसान भी पंहुचा देती है तब इन cables को अब शार्क प्रूफशील्ड से लपेटा जाता है.

और आपको जानकर हैरानी होगी कि संसार के दक्षिण ध्रुव (साउथ पोल) में स्थित अंटार्टिका महाद्वीप किसी अंडरग्राउंड केबल से नहीं जुड़ा है क्योकि यहा पर केवल रिसर्च स्टेशन है और ये स्टेशन satellite से इन्टरनेट पर निर्भर रहता है.

अब थोडा टेक्निकल में जाते है, हम जो कंप्यूटर या मोबाइल प्रयोग करते है वो क्लाइंट (client) कहलाते है और कोई भी वेबसाइट होती है वो एक Server के hard disk पर अपना डाटा रखती है और हमें उन data को एक्सेस करने की परमिशन नहीं होती है जब तक कि हमारा इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर(ISP- इन्टरनेट प्रदाता कंपनी) उस पेज को ओपन करने की परमिशन नहीं देता.

मान लीजिये आपने google.com पर जाकर कुछ सर्च करते है तो हमारा क्लाइंट(कंप्यूटर आईएसपी के माध्यम से google के server से (high प्रोसेसिंग कंप्यूटर) request करेगा कि हमारे क्लाइंट को ये जानकारी चाहिए तो Google का कंप्यूटर, हमारे आईएसपी के माध्यम से हमें बताएगा कि आप इस वेबसाइट पर जाइये आपको रिजल्ट मिल जायेगा और जब आप कोई वेबसाइट सीधे ओपन करते है (बिना google की मदद से) जैसे jagran.com तो आपका आईएसपी इस वेबसाइट के server कंप्यूटर से request करता है और हमें रिजल्ट दिख जाता है.

इन्टरनेट का मालिक कौन है?

कोई भी वास्तव में इंटरनेट का मालिक नहीं है, और कोई भी व्यक्ति या संगठन इंटरनेट को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं करता है. पूरी दुनिया में कई संगठनों जैसे कंपनी, विश्वविद्यालय, प्रकाशक, सोशल मीडिया, इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर आदि के आपसी समझौते के कारण इंटरनेट काम करता है। इसलिए कोई भी संगठन इंटरनेट का मालिक नहीं है.

इन्टरनेट का इतिहास- History of Internet in Hindi 

इन्टरनेट क्या है

इन्टरनेट का इतिहास जानने से पहले ये जान लेते है कि इन्टरनेट की जरुरत क्यों पड़ी? इसके लिए हमें थोडा समय में पीछे जाना पड़ेगा वर्ष 1957 में सोवियत यूनियन ने दुनिया का पहला इंसानों द्वारा बनाया गया Sputnik satellite पृथ्वी की कक्षा में में छोड़ा था और उस समय अमेरिका (U.S.A) सोवियत यूनियन के बीच शीत युद्ध चल रहा था और आप देख सकते है कि सोवियत यूनियन ऐसी चीजो पर काम कर रहा था जो ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं था जबकि अमेरिका के वैज्ञानिक टीवी और कार बनाने में व्यस्त थे. अमेरिका को डर था कि कही मिसाइल से सोवियत यूनियन कही उनके टेलीफोन लाइन्स को बर्वाद ना कर दे तब जाकर अमेरिका में टेक्नोलॉजी पर और ध्यान दिया और नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA- वर्ष 1958), Advanced Research Projects Agency Network (ARPANET) की स्थापना की ARPANET ही बाद में इन्टरनेट का आधार बना.

फिर 1962  में MIT के वैज्ञानिक और प्रोफेसर J.C.R. Licklider ने एक कंप्यूटर नेटवर्क का विचार दिया ताकि टेलीफोन लाइन्स बर्वाद हो जाने पर भी बात हो सके। वर्ष 1969 में University of California और Stanford University के बीच (571 km) दो कंप्यूटर को ARPANET के माध्यम से “LOGINसन्देश भेजा गया Stanford University के कंप्यूटर को केवल “LO” मिला इसके बाद इसमे दो colleges को और जोड़ा गया वर्ष 1969 में ARPANET में तेजी से काम होने लगा.

इसके लिए यूनिवर्सिटी और रिसर्च सेंटर में कंप्यूटर इनस्टॉल करके उन्हें एक दूसरे से जोड़ा गया. इस तरह ARPANET एक wide area network बन गया था जिसमे कुछ गिने चुने कंप्यूटर लम्बी दूरी पर एक दूसरे से जुड़े थे.

1970s में Robert Kahn and Vinton Cerf ने ट्रांसमिशन कण्ट्रोल प्रोटोकॉल (TCP) और इन्टरनेट प्रोटोकॉल (IP) का विकास किया जो एक communications protocol है और ये तय करता है कि बहुत सारे नेटवर्क्स के बीच डाटा को कैसे भेजना है. Tim Berners-Lee ने WWW का 1989 में आविष्कार किया. आप Internet Timeline से इसके इतिहास के बारे में जान सकते है. 

भारत में इन्टरनेट का इतिहास

भारत में इन्टरनेट कि शुरुआत Educational Research Network (ERNET) के वर्ष 1986 में हो गयी थी लेकिन केवल बड़े college जैसे कुछ IITs में research कामो के लिए और कुछ सरकारी रिसर्च सेंटर में। 15 August 1995 में पब्लिक के लिए सरकारी कंपनी विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL अब Tata Communications Ltd) द्वारा लांच किया गया था. और इस समय उपभोक्ता को अधिकतम 56 kbit/s स्पीड मिलती थी और वर्ष 1997 में TRAI (टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का गठन हो जाने के बाद TRAI ने 2004 में ब्रॉडबैंड पालिसी टेलिकॉम मंत्रालय को  रिपोर्ट सौपी, जिसमे कहा गया कि किसी भी इन्टरनेट उपभोक्ता को न्यूनतम  download speed 256 kilobits per second (kbps) मिलनी चाहिए.

वर्ष 2004 के बाद से भारत में इन्टरनेट का विकास थोड़ी तेजी से हुआ वर्ष 2008 में 3G सेवा सरकारी कंपनी Mahanagar Telephone Nigam Ltd (MTNL) ने और अप्रैल 2012 एयरटेल ने 4G सर्विस शुरू की.

इन्टरनेट के प्रकार ( Types of the Internet)

Dial-up Internet

इस प्रकार के इन्टरनेट में उपभोक्ता को टेलीफोन लाइन के द्वारा इन्टरनेट चलाता है. ये लगभग हर जगह मिल जाता है। इसमे उपभोक्ता फ़ोन पर बात करना और इन्टरनेट चलाना एक साथ दोनों काम नहीं कर सकता है. इसमे इन्टरनेट की स्पीड बहुत कम(अधिकतम 56 kbit/s)  होती है.

Satellite Internet

इसमे उपभोक्ता को पृथ्वी की कक्षा में घूमते हुए Satellite से कनेक्ट करके इन्टरनेट दिया जाता है. इस तरह का इन्टरनेट ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्र (Remote area) के लिए ज्यादा उपयुक्त होता है. भारत में इस तरह की सेवा Airtel देता है इसमे आ.पको अधिकतम 2 Mbps की स्पीड मिलती है.

DSL (Digital Subscriber Line)

इसमे आपको कॉपर वायर के टेलीफोन लाइन के द्वारा इन्टरनेट सर्विस मिलती  है. इसमे आपको अधिकतम 100 Mbps तक की स्पीड मिल सकती है. इसमे किसी तरह की नए wire की जरुरत नहीं होती है इसमे आप टेलीफोन का प्रयोग करते समय इन्टरनेट भी चला सकते है. टेलीफोन कंपनी से जितना ज्यादा पास आपका घर या ऑफिस होगा उतनी ही अच्छी स्पीड मिलेगी.

Mobile internet (2G, 3G, 4G, and 5G)

मोबाइल फ़ोन में वायरलेस इन्टरनेट का प्रयोग किया जाता है. ये वायरलेस  इन्टरनेट मोबाइल कंपनियों के टावर से signal लेते है. अलग अलग नेटवर्क की स्पीड भिन्न हो सकती है भारत में इस समय 4G (चौथी पीढ़ी) सेवा चल रही है और और मुकेश अम्बानी के अनुसार 5G भी वर्ष 2021 में आ जायेगा और 3G तो अब नाम का रह गया है. भारत में इस समय Vodafone Idea (Vi) की स्पीड 13.74 Mbps सबसे ज्यादा है.

वायरलेस हॉटस्पॉट (Wireless hotspot)

इस तरह के इन्टरनेट हॉटस्पॉट आपको सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे या बस स्टेशन,एयरपोर्ट्स, होटल्स आदि पर मिल जाते है ये फ्री सर्विस भी होते है और ज्यादा उपयोग के लिए फीस भी देनी पड़ सकती है और इस तरह के इन्टनेट का उपयोग करने के लिए आपको अपने Laptop या Mobile का wifi on करना पड़ता है.

ऑप्टिकल फाइबर कनेक्शन 

ये रेशे (fiber) के सामान पतले wire होते है जैसे हमारे बाल के सामान पतले और इन बहुत सारे इन रेशो को मिलाकर केबल बनाते है. इसमे आपको 1 Gbps (1000 Mbps ) तक की स्पीड मिल सकती है इसमे signal, इलेक्ट्रिसिटी के फॉर्म में नहीं जाती है बल्कि प्रकाश के रूप में जाती है इसीलिये इसे ऑप्टिकल (प्रकाश) फाइबर कहते है. और इसकी स्पीड प्रकाश के स्पीड की लगभग 70 % होती है जिससे ऑप्टिकल फाइबर को ज्यादा स्पीड दे पाता है.

मोबाइल में इन्टरनेट कैसे चलाये

मोबाइल में इन्टरनेट चलाने के लिए आपके मोबाइल में 3G या 4G एक्टिवेटिड सिम जैसे जिओ, एयरटेल, बीएसएनएल आदि का होना चाहिए. सिम आप किसी भी उस कंपनी के स्टोर से ले सकते है इसके बाद आपको कोई डाटा प्लान रिचार्ज करना होगा और फिर मोबाइल डाटा शुरू करके आप इन्टरनेट से जुड़ सकते है. दूसरा तरीका है आप किसी वाईफाई से जुड़ कर मोबाइल में इन्टरनेट चला सकते है.

कंप्यूटर में इन्टरनेट कैसे चलाये 

  • इसमे पहला तरीका है इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर (इन्टरनेट प्रदान करने वाली कंपनी) का ब्रॉडबैंड कनेक्शन लेकर. अगर आप शहरी इलाके में रहते है तो आपके पास JIO, Airtel, BSNL अलावा लोकल इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर का भी विकल्प मिल जायेगा जैसे Tikona,  Spectra, Gigatel, SITI Cable 
  • दूसरा मोबाइल के हॉटस्पॉट के द्वारा या किसी हॉटस्पॉट डिवाइस द्वारा 

इन्टरनेट के लाभ और नुकसान

internet kya hai

इन्टरनेट से जुड़े कुछ अनसुने तथ्य

  • Internet world stats पर जाकर आप  इन्टरनेट से जुड़े आंकड़े देख सकते है जैसे दुनिया की 63 % जनसंख्या इन्टरनेट से जुडी है. और भारत की 56 करोड़ आबादी इन्टरनेट से जुडी है.
  • Fastmetrics की रिपोर्ट के अनुसार साउथ कोरिया में औसत इन्टरनेट की स्पीड ( 26.7 Mbps) सबसे ज्यादा है जबकि भारत की औसत इन्टरनेट की स्पीड -2.8 Mbps है. 
  • Internetlivestats के अनुसार गूगल पर हर दिन 350 करोड़ सर्च किये जाते है.
  • August 15, 1995, को जब भारत में इन्टरनेट लांच हुआ था तब 5000 रुपये/महीना में 9.6 kbps dial-up connection इन्टरनेट मिलता था और अब औसत मूल्य  0.09 USD (7 रुपये) में 1 GB data मिल जाता है.
  • सबसे ज्यादा सस्ता डाटा देने में भारत दुनिया में शीर्ष पर है.
  • आज के समय में समुद्र में लगभग 380 अंडरवाटर केबल बिछे है जिसकी लम्बाई 745,645 मील से भी ज्यादा है.
  • Statista की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में सबसे ज्यादा इन्टरनेट उपभोक्ता (85 crores) चीन में है और दूसरे नंबर पर भारत है.
  • वर्ष 1986 में MS-DOS के लिए पहला वायरस ‘Brain’ पाकिस्तान के दो भाईयो Basit Farooq Alvi और Amjad Farooq Alvi  द्वारा बनाया गया था.
  • दुनिया की पहली वेबसाइट http://info.cern.ch/ अभी भी ऑनलाइन है.

निष्कर्ष

अब आप समझ गए होंगे कि इन्टरनेट क्या है- What is Internet in Hindi, इन्टरनेट का फुल फॉर्म क्या है और इन्टरनेट आप तक कैसे पहुचता है. मैंने यहा पर इन्टरनेट से जुडी सारी जानकारी दे दी है ताकि आपको अन्य ब्लॉग पर सर्च न करना पड़े पर सके अलावा भी कुछ रह गया हो तो आप मुझे कमेंट करके पूछ सकते है. 

और ये पोस्ट इन्टरनेट क्या है हिंदी में पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर जरुर करिएगा इससे मुझे सुर लिखने की प्रेरणा मिलेगी.

इस तरह की और जानकारी के लिए आप हमारे Tech, Google products और Internet केटेगरी को देख सकते है और हमारे फेसबुक, इन्स्ताग्राम, Quora और ट्विटर पेज को भी फॉलो कर सकते है.

Sunil Kumar Singh

नमस्कार दोस्तों मै सुनील कुमार सिंह, utsukHindi का technical author हूँ। मै मिर्ज़ापुर (U.P) के एक छोटे से गाँव का रहने वाला हूँ। मै एक Engineering graduate हूँ। इसलिए मुझे technical और internet से सम्बंधित नयी विषयो को पढना अच्छा लगता है।

View all posts by Sunil Kumar Singh →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!