NavIC जीपीएस क्या है? कुछ प्रमुख देशो के पास जीपीएस के अन्य विकल्प

NavIC जीपीएस क्या है? नमस्कार दोस्तों जैसा कि मैंने आपको जीपीएस के बारे बताया था कि यू एस ऐ ने शीत युद्ध के समय जीपीएस का विकास किया था जीपीएस की हिस्ट्री आप यहा पढ़ सकते है और उसी समय से जीपीएस के लिए अन्य देशो को अमेरिका पर निर्भर रहना पड़ता है इस तरह से इस क्षेत्र में अमेरिका का एक क्षत्र राज था. लेकिन अब कुछ देश इसके विकल्प पर काम कर रहे है या कर चुके है. जैसे आप भारत को ही ले लीजिये भारत ने NavIC पर काम पूरा कर लिया है और इसरो ने इससे जुडी सेवा देने के लिए MapmyIndia के साथ साझेदारी की है. 

सबसे पहले हम NavIC- Indian gps के बारे में जानेंगे उसके बाद कुछ और देशो के बारे में

जीपीएस के अन्य विकल्प की जरुरत क्यों पड़ी ?

जैसा कि मैंने आपको बताया कि जीपीएस से किसी भी किसी भी लोकेशन या इन्सान का पता लगाया जा सकता है. जीपीएस के फायदे तो बहुत है लेकिन कुछ इनमे सबसे ज्यादा प्रमुख सैन्य ऑपरेशन. अमेरिका के पास जीपीएस होने से किसी भी देश की आर्मी को किसी सैन्य कारवाई या गतिविधि के लिए अमेरिका पर निर्भर रहना पड़ता है इस तरह से अमेरिका को किसी भी तरह की गतिविधि की जानकारी रहती है इसीलिये कुछ प्रमुख देशो ने इसके विकल्प पर काम करने लगे.

इसमे सबसे पहले रूस ने इस पर काम शुरू किया उसके बाद चीन जो आज के समय में अमेरिका का एक प्रतिद्वंदी बनता ज रहा है, इसने Beidou के विकास को शीर्ष प्राथमिकता देकर इसको शुरू भी कर दिया. इसी के बाद भारत, यूरोपीय यूनियन और जापान ने भी जीपीएस के विकल्प पर काम शुरू कर दिया जिनके बारे में विस्तार से हम नीचे जानेंगे.

पांच प्रमुख देशो के पथ प्रदर्शन सिस्टम (Navigation System) जो जीपीएस का विकल्प है 

यहा पर हम 5 देशो के स्वदेशी जीपीएस के बारे में जानेंगे. ये पांच देश है भारत, रूस, चीन, यूरोपीय यूनियन (EU), जापान। यहा पर मै बता दू कि यूरोपीय यूनियन, 27 यूरोपीय देशो का समूह है.

NavIC जीपीएस क्या है
कुछ प्रमुख देशो के पास जीपीएस के अन्य विकल्प

NavIC जीपीएस क्या है- (What is Navic in Hindi)?

सबसे पहले इस Indian gps के बारे में बात करते है NavIC gps full form है-Navigation with Indian constellation. यह इसरो (Indian space research organization) द्वारा बनाया गया भारत का स्वदेशी भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली IRNSS (Indian regional navigation satellite system) है. NavIC का संस्कृत भाषा में अर्थ नाविक या Navigator है. NavIC को आप इंडियन नेविगेशन सिस्टम(Indian Navigation System) भी कह सकते है. 

भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (IRNSS) को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन( International Maritime Organisation-IMO) द्वारा मान्यता भी मिल गया है और इस तरह अमेरिका, रूस, चीन के बाद भारत चौथा देश बन गया है जिसे IMO द्वारा मान्यता मिला है.

इसमे कुल 9 IRNSS satellite है जिसमे 7 Working satellite है और बाकि 2 stand by position में है. Standby position का मतलब हुआ अगर 7 satellites में से कोई ख़राब हुआ तो उन 2 satellites में से कोई एक प्रयोग कर लेंगे. इन 9 Satellites का नाम है IRNSS -1A, 1B, 1C, 1D, 1E, 1F, 1G, 1H, 1I  पहला satellite 2013 में अन्तरिक्ष में छोड़ा गया था और इनमे से 1 H असफल रहा था और अंतिम satellite 2018 में छोड़ा गया। यह प्रणाली 5 मीटर की एक्यूरेसी तक काम करता है.

NavIC के उपयोग 

 यह भारत की सीमा के 1500 km कि रेंज तक काम करता है। जो भारत कि सेना कि शक्ति में वृद्धि करेगी. और भारत को USA के जीपीएस पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. यह प्राकृतिक आपदा (Natural disaster जैसे सुनामी, भूकंप) के समय सटीक जानकारी दे सकेगा. इसे स्मार्टफोन में प्रयोग किया जायेगा.

Glonass (Russia)

इसका पूरा नाम Global navigation satellite system है. 24 satellite की सहायता से वर्ष 1995 में यह पूरी तरह काम करने लगा था. लेकिन उसके बाद रूस की इकॉनमी गिरने लगी और रूस ने अन्तरिक्ष क्षेत्र में पूंजी (funding) कम लगाने लगी. तो इस project को रोक दिया गया।लेकिन May 2000 में ब्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के राष्ट्रपति बनने के बाद इस प्रोजेक्ट को फिर से शुरू किया गया और वर्ष 2011 में Glonass फिर से काम करने लगा. Positional accuracy (स्थान सटीकता) के मामले में जीपीएस, ग्लोनास से अच्छा है लेकिन high altitude (उच्च अक्षांशो) जैसे उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव में ग्लोनास कि सटीकता अच्छी है.

BeiDou (China)

चीन के जीपीएस का नाम Beidou है. Beidou का मतलब है Big dipper (सप्तऋषि तारामंडल) इसी तारामंडल में  North Star है. प्राचीन चीन में इसी उत्तरी तारे के सहारे लोग यात्रा करते थे. यह Chinese gps 2011 में शुरू हुआ था. अब इसके 3 version आ चुके है। अभी  चीन के अधिकांश लोग beidou का इस्तेमाल करते है. यह पूरे चीन को बहुत सटीकता से cover करता है. आजकल एटीएम को चोरी करके उससे transaction (लेनदेन) किया जाता है. इस beidou की यही अच्छी बात है कि यह फ़र्ज़ी लेनदेन की location भी बता देता है.

Galileo gps (European union यूरोपीय संघ)

यूरोपीय संघ के जीपीएस का नाम Galileo है. इसमे 30 सैटेलाइट है. इटली के महान खगोलशास्त्री गैलीलियो के नाम पर इसका नाम रखा गया. यह 2014 में शुरू हुआ था और 2020 के अंत तक पूरी तरह से काम करने लगेगा. गैलीलियो का महत्वपूर्ण उपयोग global search and rescue (खोजना और बचाना) है. कोई भी मानव यदि किसी ऊंचे पर्वत या गहरे समुद्र में फसा है तो यह उसका 10 मिनट में लगा सकता है.

QZSS (Japan)

पूरा नाम Quasi Zenith Satellite System है. इसे जापान की Advanced Space Business Corporation (ASBC) शुरू किया था लेकिन बाद में इसे JAXA (japan aerospace exploration agency) को सौप दिया गया. इस सिस्टम में 4 satellite है जो पूरी तरह से USA के जीपीएस से अनुकूल (compatible) है. और यह जीपीएस की क्षमता को भी बढाता है. यह 2018 से पूरी तरह काम करने लगा है. वर्ष 2023 तक इसमे कुल 7 satellite जोड़े जायेंगे.

जीपीएस और GLONASS ग्लोबल नेविगेशन सिस्टम है जबकि भारत, जापान, चीन और EU के पास रीजनल (क्षेत्रीय) नेविगेशन सिस्टम है. आपने यह भी जाना कि कुछ मजबूत देश भी स्वयं का जीपीएस बना रहे है या बना चुके है ताकि इस टेक्नोलॉजी के लिए USA पर निर्भर न रहना पड़े. और यहा पर ये भी बताया कि नाविक जीपीएस क्या होता है.

निष्कर्ष

दोस्तों मुझे पूरा यकीं है आपको ये पोस्ट NavIC जीपीएस क्या है (What is Navic in Hindi) जरुर पसंद आई होगी और आप NavIC को देशी जीपीएस भी कह सकते है. इससे सम्बंधित कोई और प्रश्न हो तो आप मुझे कमेंट करके लिख सकते है. 

इस तरह की और जानकारी के लिए आप हमारे Tech, Google products और Internet केटेगरी को देख सकते है और हमारे फेसबुक, इन्स्ताग्राम, Quora और ट्विटर पेज को भी फॉलो कर सकते है। आप हमारे वेबसाइट utsukhindi.in को सब्सक्राइब भी कर सकते है.

Sunil Kumar Singh

नमस्कार दोस्तों मै सुनील कुमार सिंह, utsukHindi का technical author हूँ। मै मिर्ज़ापुर (U.P) के एक गाँव का रहने वाला हूँ। मै एक Engineering graduate हूँ। इसलिए मुझे technical और internet से सम्बंधित नयी विषयो को पढना अच्छा लगता है।

View all posts by Sunil Kumar Singh →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *